वायरल वीडियो में मारपीट और ‘जय भीम’ के नारे लगवाने का दावा, CCTV और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से आरोपियों की पहचान में जुटी पुलिस
अलीगढ़, 17 सितंबर 2026।
अलीगढ़ के सिविल लाइन थाना क्षेत्र में क्षत्रिय युवा करणी सेना के जिलाध्यक्ष सचिन राघव के साथ हुई मारपीट का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, घटना का वीडियो सामने आने के बाद 100 से अधिक अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किए जाने की जानकारी है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों की पहचान CCTV फुटेज, वायरल वीडियो और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है।
पुलिस की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, सिविल लाइन थाना क्षेत्र में दो व्यक्तियों के साथ मारपीट की सूचना मिली थी। मामले में तत्काल मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई। बाद में पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ भी शुरू की और 17 सितंबर को कई लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई।
घटना और वायरल वीडियो के संबंध में हिन्दुस्तान की रिपोर्ट भी सामने आई है।
स्टेट बैंक के पास सचिन राघव के साथ हुई मारपीट
रिपोर्टों के अनुसार, बुधवार शाम सचिन राघव अपने भाई सुंदर सिंह राघव और अन्य साथियों के साथ सिविल लाइन क्षेत्र में स्टेट बैंक की मुख्य शाखा के आसपास मौजूद थे। इसी दौरान वहां भीड़ पहुंची और विवाद के बाद सचिन राघव के साथ मारपीट शुरू हो गई।
रिपोर्टों में उनके साथ मौजूद लोगों के साथ भी मारपीट किए जाने की बात सामने आई है। सचिन राघव को सड़क पर दौड़ाकर पीटने और बाद में अंबेडकर पार्क की ओर ले जाने का आरोप है।
वायरल वीडियो में सचिन राघव को कुछ लोगों से घिरा हुआ देखा जा सकता है। वीडियो में उनके हाथ जोड़कर माफी मांगने और ‘जय भीम’ के नारे लगवाए जाने का दावा भी किया जा रहा है। हालांकि, वीडियो के पूरे घटनाक्रम और उसमें शामिल प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही होगी।
100 से अधिक अज्ञात लोगों पर मुकदमा
रिपोर्टों में मारपीट के मामले में 100 से अधिक अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किए जाने का उल्लेख है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच में मिले साक्ष्यों के आधार पर होगी।
पुलिस का कहना है कि CCTV और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की मदद से घटना में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है। संबंधित व्यक्तियों की भूमिका सामने आने के बाद उनके खिलाफ आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
कई लोगों को हिरासत में लिया, गिरफ्तारियां भी सामने आईं
मामले में पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की थी। शाम तक सामने आए अपडेट में पुलिस की ओर से CCTV फुटेज के आधार पर कई लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी भी दी गई है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में सभी गिरफ्तार लोगों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। गिरफ्तारी और हिरासत की अंतिम संख्या की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
सफाई कर्मचारियों ने काम बंद कर किया प्रदर्शन
एक युवक की गिरफ्तारी के बाद मामला एक और मोड़ पर पहुंच गया। वाल्मीकि समाज से जुड़े सफाई कर्मचारियों ने गिरफ्तारी के विरोध में काम बंद कर हड़ताल शुरू कर दी।
कर्मचारियों ने सिविल लाइन थाने का घेराव/धरना किया और पुलिस से मांग की कि सचिन राघव के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया जाए। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांग पर कार्रवाई नहीं होती, वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे। इसका असर शहर की सफाई और कूड़ा उठाने की व्यवस्था पर भी पड़ा।

एसपी सिटी कार्यालय भी पहुंचा एक पक्ष
दूसरी ओर, सचिन राघव के साथ हुई मारपीट को लेकर सवर्ण समाज के विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता एसपी सिटी कार्यालय पहुंचे। उन्होंने आरोपियों की पहचान कर कानूनी कार्रवाई की मांग की और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग रखी।
थाना सिविल लाइन के बाहर प्रदर्शन के दौरान पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की। मौके पर वरिष्ठ अधिकारी और पुलिस बल भी तैनात किया गया।
जातिसूचक टिप्पणी के आरोप में अलग FIR
भाषा की रिपोर्ट, IBC24 पर प्रकाशित, में इस अलग मामले की जानकारी दी गई है।
इस पूरे विवाद के बीच पुलिस ने एक अलग मामले में 11 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। यह मामला आरक्षण-विरोधी प्रदर्शन के दौरान वाल्मीकि समुदाय के खिलाफ कथित जातिसूचक और अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोप से जुड़ा है।
इस FIR में गो रक्षा दल के नेता सुंदर सिंह राघव और उनके भाई सचिन राघव के नाम शामिल हैं। शिकायत आजाद पार्टी के जिला अध्यक्ष नितिन वाल्मीकि की ओर से थाना बन्नादेवी में दी गई थी। पुलिस के अनुसार इस मामले में BNS की धारा 352 और SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।
इस तरह फिलहाल अलीगढ़ में दो अलग-अलग मामले जांच के दायरे में हैं—एक सचिन राघव और अन्य लोगों के साथ हुई मारपीट से संबंधित और दूसरा कथित जातिसूचक टिप्पणी से संबंधित। पुलिस दोनों मामलों में उपलब्ध वीडियो और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ा रही है।
अब आगे क्या होगा?
पुलिस की जांच का अगला महत्वपूर्ण चरण CCTV फुटेज, वायरल वीडियो और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच है। इसके आधार पर मारपीट में शामिल लोगों की पहचान और उनकी भूमिका तय की जाएगी। जिन लोगों की संलिप्तता प्रमाणित होगी, उनके खिलाफ कानून के मुताबिक आगे की कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, जातिसूचक टिप्पणी के मामले में नामजद आरोपियों के खिलाफ भी अलग से जांच जारी है। एसएसपी ने स्पष्ट किया है कि दोनों मामलों में साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी और शांति व्यवस्था बिगाड़ने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कदम उठाया जाएगा।
अलीगढ़ में फिलहाल मामला दो FIR, गिरफ्तारियों और विरोध-प्रदर्शनों के बीच जांच के दौर में है। पुलिस के सामने चुनौती दोनों पक्षों से जुड़े आरोपों की अलग-अलग जांच कर साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करने की है।
THE AS WIRE | अलीगढ़
17 सितंबर 2026 तक उपलब्ध पुलिस एवं मीडिया रिपोर्टों के आधार पर तैयार रिपोर्ट
दोनों मामलों में आरोप जांच के दायरे में हैं। FIR दर्ज होना या गिरफ्तारी होना दोषसिद्धि नहीं है।

