नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर अपनी सक्रियता से पहचान बनाने वाले स्वतंत्र भारद्वाज जंतर-मंतर से जुड़े एक कथित मारपीट मामले को लेकर चर्चा में हैं। छात्र कार्यकर्ता निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ कथित मारपीट के मामले में उनकी गिरफ्तारी हुई थी। अब दिल्ली की पटियाला हाउस अदालत से उन्हें तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत मिली है।
सोशल मीडिया से मिली पहचान
मीडिया रिपोर्टों में भारद्वाज को हिंदुत्व से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर बताया गया है। उनके पोस्ट और वीडियो में धर्म, आरक्षण और राजनीतिक विषयों पर विचार दिखाई देते रहे हैं। हालांकि, सोशल मीडिया पर सक्रियता या नेताओं के साथ तस्वीरें अपने आप में किसी राजनीतिक दल में औपचारिक पद का प्रमाण नहीं हैं।
जंतर-मंतर विवाद क्या है?
यह मामला दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरेाच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान हुई कथित मारपीट से जुड़ा है। आरोप है कि प्रदर्शन में आए संजय कुमार के साथ मारपीट की गई। घटना से संबंधित वीडियो और पॉडकास्ट को लेकर भी विवाद हुआ तथा पुलिस कार्रवाई की मांग उठी।
मामले में बाद में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएं भी जोड़ी गईं। ये आरोप न्यायिक जांच का विषय हैं और इन्हें दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता।
बचाव पक्ष ने क्या कहा?
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, भारद्वाज के वकील ने अदालत में गिरफ्तारी को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया। बचाव पक्ष ने यह भी दावा किया कि शिकायतकर्ता ने पहले भारद्वाज पर हमला किया था और अपने पक्ष में एक वीडियो का हवाला दिया। ये बचाव पक्ष की दलीलें हैं, अदालत का अंतिम निष्कर्ष नहीं।
15 सितंबर को तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत
बार एंड बेंच की 15 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, पटियाला हाउस कोर्ट ने भारद्वाज को तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत दी। नियमित जमानत पर निर्णय से पहले इस अवधि के दौरान उनके आचरण पर नजर रखी जाएगी।
अदालत ने किन शर्तों पर राहत दी?
लाइव लॉ की विस्तृत कोर्ट रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरिम जमानत की अवधि में भारद्वाज को मामले, अपने बचाव या शिकायतकर्ता और उसके परिवार के बारे में सार्वजनिक मंचों पर बयान, वीडियो, पॉडकास्ट अथवा पोस्ट साझा करने से रोका गया है।
रिपोर्ट के अनुसार अदालत ने जांच में कुछ कमियों पर पुलिस से स्थिति रिपोर्ट भी मांगी है। नियमित जमानत की याचिका पर अगली सुनवाई 6 अक्टूबर के लिए सूचीबद्ध बताई गई है। अदालत ने शिकायतकर्ता की सुरक्षा और आरोपी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता, दोनों पहलुओं पर विचार किया।
क्या मामला खत्म हो गया है?
नहीं। अंतरिम जमानत अस्थायी राहत है; यह न तो आरोपों से बरी किया जाना है और न ही दोषसिद्धि। आरोपों और बचाव पक्ष की दलीलों पर अंतिम निष्कर्ष आगे की न्यायिक प्रक्रिया में ही निकलेगा। नियमित जमानत पर विचार करते समय अदालत मामले की स्थिति और निर्धारित शर्तों के पालन को देखेगी।
फिलहाल भारद्वाज का मामला सोशल मीडिया पर सार्वजनिक टिप्पणी, प्रदर्शन के दौरान कथित हिंसा और अदालत की जमानत शर्तों के कारण चर्चा में है। आगे की जानकारी के लिए न्यायिक कार्यवाही और पुष्ट रिपोर्टों पर नजर रखना जरूरी होगा।
यह भी पढ़ें: दिल्ली NCR की अन्य खबरें

