उज्जैन। महाकाल की नगरी उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के बीच प्राचीन खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को लेकर मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। प्रशासन पिछले कई दिनों से प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली। 8 सितंबर की शाम तक उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, करीब पांच दिन की कोशिशों के बाद भी प्रतिमा वहीं मौजूद है।
यह मामला सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत कंठाल चौराहा से छत्री चौक तक सड़क चौड़ीकरण से जुड़ा है। प्रस्तावित सड़क के दायरे में आने के कारण प्रशासन मंदिर और प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से विस्थापित करना चाहता है। मंदिर की इमारत का कुछ हिस्सा हटाया जा चुका है और प्रतिमा को फिलहाल टेंट लगाकर सुरक्षित रखा गया है।

पांच दिन से कोशिश, लेकिन प्रतिमा अडिग
प्रतिमा को हटाने के लिए क्रेन और अन्य तकनीकी साधनों की मदद ली गई। इंदौर से तकनीकी विशेषज्ञ भी बुलाए गए, लेकिन प्रतिमा को नुकसान पहुंचाए बिना हटाने की कोशिश सफल नहीं हो सकी। प्रशासन ने अब जल्दबाजी से बचते हुए प्रतिमा के आधार और आसपास की स्थिति की तकनीकी जांच कराने का फैसला किया है।
अब होगी तकनीकी स्कैनिंग
अभी सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रतिमा आखिर किस तरह स्थापित है और उसे सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित करना संभव है या नहीं। प्रशासन के मुताबिक, पुरातत्व विशेषज्ञों की टीम आधुनिक मशीनों से प्रतिमा के आधार, अंदरूनी संरचना और आसपास की मिट्टी की स्कैनिंग करेगी। रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की तकनीक और कार्रवाई तय की जाएगी। अमर उजाला के मुताबिक स्कैनिंग रिपोर्ट आने में अगले 2 से 4 दिन लग सकते हैं।
टंकी चौक पर स्थापित करने की योजना
प्रशासन की योजना प्रतिमा को टंकी चौक पर सुरक्षित तरीके से स्थापित करने की है। हालांकि, अभी तक प्रतिमा वहां नहीं पहुंची है। पुजारी पक्ष ने भी प्रतिमा को किसी तरह की क्षति न होने की लिखित गारंटी की मांग की है।
आस्था और तकनीक के बीच चर्चा
प्रतिमा के लगातार अपनी जगह पर बने रहने के बाद स्थानीय श्रद्धालुओं और धार्मिक संगठनों में इसे लेकर गहरी आस्था देखने को मिल रही है। कई श्रद्धालु इसे धार्मिक आस्था से जोड़कर देख रहे हैं और प्रतिमा को हटाने का विरोध भी कर रहे हैं। मंगलवार को बड़ी संख्या में लोगों ने मंदिर परिसर में महाआरती की।
वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि प्रतिमा की वास्तविक उम्र, निर्माण तकनीक और उसके आधार की स्थिति को वैज्ञानिक परीक्षण के जरिए समझना जरूरी है। विक्रम विश्वविद्यालय के पुरातत्व विशेषज्ञ प्रो. डॉ. रमण सोलंकी ने इसे ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताते हुए विशेषज्ञ जांच और सुरक्षित स्थानांतरण की जरूरत बताई है।
अभी की स्थिति क्या है?
8 सितंबर 2026 की शाम तक:
- प्रतिमा अभी भी अपनी मूल जगह पर है।
- करीब 5 दिन की कोशिशों के बाद भी स्थानांतरण नहीं हो पाया।
- मंदिर का भवन हटाया जा चुका है, लेकिन प्रतिमा को सुरक्षित रखा गया है।
- तकनीकी/पुरातत्व स्कैनिंग की जा रही है।
- स्कैनिंग रिपोर्ट के बाद अगला फैसला होगा।
- टंकी चौक पर स्थापित करने की योजना है, लेकिन अभी वहां स्थापित नहीं हुई है।

